
अमेरिका के हमले और मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में हड़कंप मच गया है. इस बीच हम दोनों की सैन्य ताकत के बारे में बताएंगे.
अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ गिरफ्तार कर लिया. इस कार्रवाई को अमेरिका की एलीट डेल्टा फोर्स ने अंजाम दिया. इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि अगर यह टकराव पूर्ण युद्ध में बदलता है तो वेनेजुएला की सेना अमेरिका जैसी महाशक्ति के सामने कितनी देर तक टिक पाएगी. हालांकि वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने आखिरी सांस तक लड़ने की बात कही है, लेकिन सैन्य क्षमता के आंकड़े दोनों देशों के बीच भारी असंतुलन की कहानी कहते हैं. ग्लोबल फायर इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका सैन्य ताकत के मामले में पहले नंबर पर है. वहीं वेनेजुएला 50 वें नंबर पर है. इससे साफ पता चलता है कि वेनेजुएला अमेरिका के आस-पास भी नहीं टिकता है.
वेनेजुएला की सशस्त्र सेनाओं को नेशनल बोलिवेरियन आर्म्ड फोर्सेस कहा जाता है. यह सेना मुख्य रूप से देश की आंतरिक सुरक्षा और सरकार की स्थिरता बनाए रखने के लिए बनाई गई है. मौजूदा समय में इसके सक्रिय सैनिकों की संख्या करीब 1 लाख 9 हजार के आसपास मानी जाती है. इसके अलावा रिजर्व फोर्स में लगभग 8 हजार जवान हैं. अगर अर्धसैनिक बलों और मिलिशिया को भी जोड़ दिया जाए तो कुल संख्या करीब 2 लाख 20 हजार तक पहुंचती है. हालांकि यह संख्या कागजों पर मजबूत दिखती है, लेकिन ट्रेनिंग, सोर्स और तकनीक के मामले में यह सेना सीमित मानी जाती है.
वायुसेना और जमीनी ताकत
वेनेजुएला की वायुसेना के पास कुल मिलाकर लगभग 229 विमान हैं. इनमें से ज्यादातर पुराने रूसी मॉडल के हैं, जैसे Su-30MK2. आधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स या एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम की भारी कमी है. आधुनिक मिसाइल और सटीक हवाई हमलों के सामने इन विमानों की प्रभावशीलता सीमित मानी जाती है. जमीनी सेना के पास लगभग 170 से 200 टैंक और करीब 8,800 बख्तरबंद वाहन हैं. ये भी ज्यादातर पुराने और सीमित तकनीक वाले हैं. नौसेना की बात करें तो वेनेजुएला के पास छोटे युद्धपोत और तटरक्षक नौकाएं हैं, लेकिन कोई विमानवाहक पोत या बड़ी समुद्री स्ट्राइक क्षमता नहीं है.
रक्षा बजट बना सबसे बड़ी कमजोरी
वेनेजुएला का वार्षिक रक्षा बजट लगभग 4 से 5 अरब डॉलर के आसपास बताया जाता है. यह बजट आधुनिक हथियार, नई तकनीक और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए बेहद अपर्याप्त माना जाता है. आर्थिक संकट और प्रतिबंधों की वजह से सेना का आधुनिकीकरण लंबे समय से रुका हुआ है.
अब नजर डालते हैं अमेरिका की सैन्य ताकत पर
दूसरी ओर अमेरिका दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में जाना जाता है. यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री में करीब 13 लाख सक्रिय सैनिक हैं. इसके अलावा रिजर्व और नेशनल गार्ड को मिलाकर यह संख्या करीब 21 लाख तक पहुंच जाती है, जो वेनेजुएला की तुलना में कई गुना ज्यादा है.
अमेरिकी एयर पावर और नौसेना का दबदबा
अमेरिका के पास 13,000 से अधिक सैन्य विमान हैं, जिनमें F-22 और F-35 जैसे अत्याधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट शामिल हैं. ये विमान रडार से बचने और सटीक हमले करने में सक्षम हैं. समुद्री ताकत की बात करें तो अमेरिकी नौसेना के पास लगभग 440 युद्धपोत हैं, जिनमें 11 परमाणु विमानवाहक पोत शामिल हैं. इसके अलावा मिसाइल विध्वंसक, परमाणु पनडुब्बियां और लंबी दूरी तक मार करने वाली क्षमताएं अमेरिका को समुद्र में अपराजेय बनाती हैं.
तकनीक, न्यूक्लियर और ग्लोबल नेटवर्क
अमेरिका के पास परमाणु हथियारों का विशाल भंडार है. इसके साथ ही दुनिया भर में फैले सैन्य ठिकाने, सैटेलाइट नेटवर्क, स्पेस फोर्स और साइबर वॉर क्षमताएं उसे हर स्तर पर बढ़त दिलाती हैं. संयुक्त कमांड सिस्टम और रियल-टाइम इंटेलिजेंस अमेरिका को किसी भी युद्ध में तेज और निर्णायक बनाता है.
युद्ध हुआ तो क्या होगा नतीजा
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच अगर सीधी जंग होती है तो आमने-सामने की लड़ाई में वेनेजुएला ज्यादा देर टिक नहीं पाएगा. तकनीक, हथियार, बजट और संसाधनों में अमेरिका हर मोर्चे पर आगे है. वेनेजुएला के पास एकमात्र विकल्प पारंपरिक युद्ध की बजाय गुरिल्ला रणनीति, स्थानीय मिलिशिया और लंबे समय तक चलने वाले असममित संघर्ष का सहारा लेना हो सकता है. हालांकि यह रणनीति भी केवल सीमित समय तक ही असर दिखा सकती है.
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