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Us Tariffs On Indian Goods Us Commerce Minister Reveals If Pm Modi Called Donald Trump Not Implemented High Taxes

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अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के साथ व्यापार समझौते किए हैं लेकिन उन्हें लगता था कि भारत के साथ व्यापार समझौता पहले हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय सामानों पर टैरिफ और बढ़ा सकते हैं. वह लगातार यह कह रहे हैं कि रूस से तेल खरीदने की वजह से उन्होंने भारतीय सामानों पर भारी भरकम टैरिफ लगाया है. इस समय भारत पर 50 प्रतिशत टैरीफ लागू है. हालांकि, अब पता चला है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोन न करने की वजह से ट्रंप की ईगो हर्ट हुई. अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने बताया है कि भारत के साथ व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया.

हॉवर्ड लुटनिक ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि पीएम मोदी जानते थे कि वह भारत के रूसी तेल खरीदने से नाखुश हैं और अमेरिका कभी भी भारत पर शुल्क बढ़ा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह बयान दोनों देश के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान दिया. व्यापार समझौते पर अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है. इस समझौते में अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय सामानों पर लगने वाले 50 प्रतिशत शुल्क के समाधान के लिए एक ढांचागत समझौता शामिल है.

'डील तैयार थी, बस पीएम मोदी को फोन करना था', बोले अमेरिकी मंत्री
लुटनिक ने गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को एक ‘पॉडकास्ट’ में कहा कि उन्होंने पीएम मोदी से राष्ट्रपति को फोन करके समझौते को अंतिम रूप देने का अनुरोध किया था. हालांकि, भारत ऐसा करने में असहज महसूस कर रहा था इसलिए पीएम मोदी ने फोन नहीं किया. वाणिज्य मंत्री ने कहा कि अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के साथ व्यापार समझौते किए हैं लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि भारत के साथ व्यापार समझौता इन देशों से पहले हो जाएगा.

'भारत ने बाद में फोन किया', अमेरिकी मंत्री ने बताया
उन्होंने कहा, '...हमने इंडोनेशिया, फिलीपीन और वियतनाम के साथ कई समझौते किए और उनकी घोषणा भी कर दी. ये सभी समझौते इसलिए ऊंची दरों पर किए गए क्योंकि बातचीत के दौरान यह मान लिया गया था कि भारत पहले ही प्रक्रिया पूरी कर लेगा... लेकिन ऐसा नहीं हुआ. नतीजतन, जिन देशों के साथ पहले समझौते हुए, वे महंगे या ऊंची दर पर तय हुए. फिर बाद में जब भारत ने संपर्क (फोन) किया और कहा, 'ठीक है, हम तैयार हैं तो मैंने उनसे कहा- किस बात के लिए तैयार हैं?'

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