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Qari Ishaq Gora Said Increasing Number Of Muslim Cases In Police Stations And Courts Shameful Ann

Qari Ishaq Gora Said Increasing Number Of Muslim Cases In Police Stations And Courts Shameful Ann

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जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक और देश के प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने मुस्लिम समाज की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है.

जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक और देश के प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने समाज की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है. रविवार (1 फरवरी) को जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि पुलिस थानों और अदालतों में मुसलमानों से जुड़े घरेलू विवाद, तलाक़, पारिवारिक झगड़े और आपसी क्लेश के मामले बड़ी संख्या में सामने आना पूरे समाज के लिए शर्मिंदगी की बात है.

मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने कहा कि जब लोग उनसे यह सवाल करते हैं कि थानों और अदालतों में मुसलमानों के केस सबसे ज़्यादा क्यों दिखाई देते हैं तो उन्हें बेहद दुख होता है. उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि यह स्थिति किसी भी ज़िम्मेदार और जागरूक नागरिक के लिए चिंता का विषय है. उनके मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह समाज में सही शिक्षा और अच्छे संस्कारों की कमी है.

उन्होंने कहा कि समय के साथ हम अपने धार्मिक और नैतिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं. सही तालीम, समझ और अच्छे व्यवहार की जगह हमने झूठी परंपराओं और गलत रिवाज़ों को अपना लिया है. इसी का नतीजा है कि घर के छोटे-छोटे मसले बड़े झगड़ों में बदल जाते हैं और बात सीधे पुलिस और अदालत तक पहुंच जाती है.

क़ारी इसहाक़ गोरा ने दी चेतावनी
क़ारी इसहाक़ गोरा ने यह भी कहा कि अक्सर लोग अपनी गलतियों को मानने के बजाय दूसरों को दोष देते हैं. हम हालात, व्यवस्था और सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन अपने व्यवहार और सोच पर ध्यान नहीं देते. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही हालात बने रहे तो आने वाली पीढ़ियां हमसे सवाल करेंगी कि हमने उन्हें कैसी विरासत दी.

'क़ौम सिर्फ़ नारों से आगे नहीं बढ़ती'
उन्होंने कहा कि कोई भी क़ौम सिर्फ़ नारों से आगे नहीं बढ़ती, बल्कि ज्ञान, चरित्र और नैतिकता से आगे बढ़ती है. अगर समाज में आपसी सम्मान, सब्र और समझ होगी, तो विवाद अपने आप कम हो जाएंगे. अपने संदेश के अंत में मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने सभी मुसलमानों से आत्ममंथन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि आज सबसे ज़्यादा ज़रूरत अपने आप को सुधारने, शिक्षा पर ध्यान देने और बच्चों की सही परवरिश करने की है.

iहाल के वर्षों में देश की कई सामाजिक रिपोर्टों और अदालतों के आंकड़ों में यह बात सामने आती रही है कि घरेलू विवादों और पारिवारिक मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सामाजिक जानकारों का भी मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और संवाद की कमी विवादों की बड़ी वजह बन रही है. ऐसे में क़ारी इसहाक़ गोरा का यह संदेश समाज को आईना दिखाने वाला माना जा रहा है, जिससे लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझने और सुधार की दिशा में कदम उठाने की प्रेरणा मिल सकती है.

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