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General Mm Naravane Unpublished Memoir Book Maturing Like Old Wine Says Himachal Litreature Festival Rahul Gandhi Rajnath Singh

General Mm Naravane Unpublished Memoir Book Maturing Like Old Wine Says Himachal Litreature Festival Rahul Gandhi Rajnath Singh

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस किताब के विवाद को यह कहकर नकार दिया, कि जो किताब अभी छपी ही नहीं, न उसकी पुष्टि की गई. उसे संसद में कतई कोट नहीं किया जा सकता.

भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (MM Naravane) की जो अप्रकाशित किताब है, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने उसका जिक्र किया तो सदन में बवाल हो गया. हंगामा इतना बढ़ा कि सदन को मंगलवार तक स्थगित कर दिया गया है. राहुल गांधी ने एक मैगजीन का जिक्र करते हुए कहा था कि वह इसमें छपे नरवणे के एक कथित कोट का हवाला देना चाह रहे थे. 

किताब में चीन के साथ डोकलाम संघर्ष का जिक्र है

यह कथित हिस्सा अप्रकाशित संस्मरण में दर्ज है. राहुल गांधी किताब के जिस हिस्से का जिक्र करना चाहते थे, उसमें 2017 में चीन के साथ डोकलाम में हुए संघर्ष का जिक्र है. संस्मरण को रक्षा मंत्रालय में समीक्षा के लिए रखा गया है. वहीं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस किताब के विवाद को यह कहकर नकार दिया कि जो किताब अभी छपी ही नहीं, न उसकी पुष्टि की गई. उसे सदन में कतई कोट नहीं किया जा सकता. राहुल अपने भाषण में लगातार कह रहे थे कि चार चीनी टैंक भारतीय क्षेत्र में घुस रहे थे. वह एक पहाड़ी पर कंट्रोल करने की कोशिश में थे.  

पब्लिश होने के सवाल क्या बोले थे नरवणे?

इस किताब के पब्लिश होने में देरी को लेकर सवाल पर पिछले साल अक्टूबर में जनरल नरवणे ने एक लिटरेचर फेस्टिवल में बयान दिया था. वह हिमाचल प्रदेश के कसौली गए थे. इसमें उन्होंने जवाब दिया था कि मुझे लगता है कि यह मैच्योर हो रही है. पुरानी शराब की तरह. जितनी देर लगेगी, यह ज्यादा से ज्यादा विंटेज होगी. ज्यादा कीमत वाली. 

2024 में होनी थी किताब प्रकाशित

अप्रैल 2024 में किताब प्रकाशित होनी थी. इसका नाम फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी था. दिसंबर 2023 में इसके कुछ अंश न्यूज एजेंसी पीटीआई ने छापे थे. लेकिन रक्षा मंत्रालय ने इसकी समीक्षा करने की बात कहकर प्रकाशित होने से रोक दिया गया. इसमें मार्केटिंग टेक्सट में लिखा था कि कैसे एक युवा अधिकारी के तौर पर चीनियों से अपनी पहली मुलाकात से शुरुआत की. फिर गलवान में कैसे निपटे. इसमें उनके चार दशक के आर्मी करियर का जिक्र है. 

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