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Pm Narendra Modi Led Shaurya Yatra During Somnath Swabhiman Parv Procession Of 108 Horses Spectacular Drone Show

Pm Narendra Modi Led Shaurya Yatra During Somnath Swabhiman Parv Procession Of 108 Horses Spectacular Drone Show

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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया. 108 घोड़ों की शोभायात्रा, भव्य ड्रोन शो और अभूतपूर्व जनसमूह ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (11 जनवरी 2026) को गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले में स्थित पावन सोमनाथ मंदिर में आयोजित शौर्य यात्रा में शामिल हुए. यह यात्रा उन वीर योद्धाओं के सम्मान में निकाली गई, जिन्होंने सदियों पहले सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित इस शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली गई, जो भारतीय परंपरा में वीरता, त्याग और बलिदान का प्रतीक मानी जाती है. यह दृश्य मानो इतिहास के पन्नों को वर्तमान में जीवंत कर रहा था.

प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ एक विशेष रूप से सजाए गए गाड़ी पर सवार होकर एक किलोमीटर लंबे मार्ग से गुजरे. रास्ते के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक एकत्रित थे, जो पुष्पवर्षा और अभिवादन के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत कर रहे थे.

सोमनाथ में उमड़ा जनसमूह

सोमनाथ मंदिर परिसर में शनिवार (10 जनवरी 2026) की रात रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिली. ठंड के बावजूद श्रद्धालु आधी रात के बाद तक मंदिर परिसर में डटे रहे. प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद जनसमूह अपने चरम पर पहुंच गया. देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु—बुज़ुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे. इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने. स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए यात्रियों ने भी इस पर्व को विशेष बना दिया. प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार शाम ओंकार मंत्र का सामूहिक जाप किया, सोमनाथ बाबा के दर्शन किए और इसके बाद आयोजित भव्य ड्रोन शो को देखा. लगभग 3,000 ड्रोन आकाश में एक साथ उड़ते हुए दिव्य आकृतियां बना रहे थे, जो जमीन पर मौजूद विशाल जनसमूह के उत्साह के अनुरूप था.

प्रकाश, परंपरा और तकनीक का अद्भुत संगम

करीब 15 मिनट तक चले ड्रोन शो ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. ड्रोन से भगवान शिव, शिवलिंग, सोमनाथ मंदिर का त्रि-आयामी (3D) स्वरूप, और मंदिर के इतिहास में आए विध्वंस और पुनर्निर्माण के दृश्य प्रदर्शित किए गए. इसके बाद हुई आतिशबाजी ने समुद्र तट के आकाश को रोशनी से भर दिया. यह केवल एक दृश्यात्मक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सोमनाथ की उस कथा का प्रतीक था, जो टूटने के बाद भी हर बार और अधिक दृढ़ होकर खड़ी हुई. ड्रोन संरचनाओं में मंदिर पर हुए आक्रमणों और उसके बाद हुए पुनरुत्थान को दर्शाया गया, जो इस पर्व के मूल भाव को रेखांकित करता है.

आस्था जो दूरियों को मिटा दे

मुंबई से आई प्रीति कारेलिया, जो 24 अन्य महिलाओं के साथ एक महिला-भजन मंडली का हिस्सा थीं. उन्होंने अपनी भावना साझा करते हुए कहा, 'हम आज सोमनाथ मंदिर और अपने प्रधानमंत्री को देखने आए हैं. यह आयोजन मंदिर की परंपराओं और उसके अद्भुत धैर्य का उत्सव है. सजावट, आतिशबाज़ी और ड्रोन शो ने उस दिव्यता को और भी सशक्त बना दिया, जिसने एक ही दिन में इतने लोगों को यहां खींच लिया.' धार्मिक संतों, स्थानीय नेताओं और आम नागरिकों ने भी इस अवसर को ऐतिहासिक बताया. भावनगर से आए भारद्वाज गिरी ने वीर हमीरजी गोहिल जैसे योद्धाओं को याद करते हुए कहा कि उन्होंने “हमारे हिंदू तीर्थों के गौरव की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया.”

स्वाभिमान पर्व में सजी पूरी नगरी

सोमनाथ शहर खुद उत्सव का हिस्सा बन गया. शंख सर्कल से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक की मुख्य सड़क को फूलों, थीम आधारित सजावट और रोशनी से सजाया गया. त्रिशूल, ॐ और डमरू के आकार की रोशनी, फूलों से बने शिवलिंग और जगह-जगह लगे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के पोस्टर पूरे मार्ग को आध्यात्मिक वातावरण से भर रहे थे. शाम के समय कर्नाटक से आए लोकनृत्य कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया.

इतिहास से वर्तमान तक सोमनाथ की पुनर्स्थापना

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, महमूद गजनवी की ओर से सोमनाथ पर आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया. स्वतंत्रता के बाद इस मंदिर के पुनर्निर्माण का बीड़ा सरदार वल्लभभाई पटेल ने उठाया था. 1951 में, पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के लिए खोला गया. आज भी मंदिर के मुख्य द्वार के सामने स्थापित सरदार पटेल की प्रतिमा उस राष्ट्रीय संकल्प की याद दिलाती है. सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और सदियों से श्रद्धा, संघर्ष और आत्मबल का प्रतीक रहा है.

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