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Pakistan Gen Z Rebellion Article By Pakistani Phd Student Living In Us Zorain Nizamani Removed Sparked On Social Media

Pakistan Gen Z Rebellion Article By Pakistani Phd Student Living In Us Zorain Nizamani Removed Sparked On Social Media

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Pakistan Gen Z: पाकिस्तान में Gen Z की नई वैचारिक बगावत शुरू हो गई है. हाल ही में अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पीएचडी छात्र ज़ोरैन निज़ामानी के एक लेख को हटाने पर सोशल मीडिया पर बवाल शुरू हो गया.

पाकिस्तान में इन दिनों कोई सड़कों पर उतरा आंदोलन नहीं दिख रहा, लेकिन एक गहरी वैचारिक बगावत जरूर जन्म ले चुकी है. यह विरोध न तो हिंसक है और न ही नारेबाजी वाला, बल्कि सोच और सवालों से भरा हुआ है. इसकी चिंगारी बना एक युवा पाकिस्तानी स्कॉलर का लेख, जिसे कुछ ही घंटों में हटा दिया गया.

अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पीएचडी छात्र ज़ोरैन निज़ामानी ने 1 जनवरी को एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था It Is Over. बता दें कि निज़ामनी अभिनेता फाजिला काजी और कैसर खान निजामनी के बेटे हैं. यह लेख पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में प्रकाशित हुआ, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वेबसाइट से गायब हो गया. आरोप है कि इस लेख को पाकिस्तानी सेना के दबाव में हटाया गया, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

लेख हटते ही सोशल मीडिया पर ब्लास्ट

लेख हटते ही सोशल मीडिया पर इसके स्क्रीनशॉट वायरल हो गए. लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रहे हैं. देखते ही देखते ज़ोरैन निज़ामानी युवाओं के बीच एक प्रतीक बन गए. कई यूजर्स ने उन्हें नेशनल हीरो तक कहना शुरू कर दिया.

लेख में क्या लिखा था जिसने नाराजगी पैदा की?

अपने लेख में ज़ोरैन निज़ामानी ने कहा था कि पाकिस्तान की सत्ता पर काबिज पुरानी पीढ़ी का युवाओं पर अब कोई असर नहीं बचा है. उन्होंने लिखा कि भाषण, सेमिनार और देशभक्ति सिखाने वाले कार्यक्रम अब काम नहीं कर रहे. उनका तर्क था कि देशभक्ति जबरदस्ती पैदा नहीं की जा सकती, बल्कि यह तब आती है जब लोगों को बराबरी के मौके, मजबूत व्यवस्था और अधिकार मिलते हैं.

युवा सब देख रहे हैं – लेख का सबसे अहम संदेश

ज़ोरैन ने साफ कहा कि Gen Z और आने वाली पीढ़ी पूरी तरह समझदार है. इंटरनेट और जानकारी की पहुंच ने युवाओं को सोचने की आज़ादी दी है. अब लोग तय नहीं करना चाहते कि उन्हें क्या सोचना चाहिए.उन्होंने यह भी लिखा कि कई युवा डर के कारण बोल नहीं पाते, लेकिन वे चुपचाप देश छोड़ना बेहतर समझते हैं क्योंकि जो सवाल करता है, उसे चुप करा दिया जाता है.

लेख हटाने पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

लेख हटने के बाद पाकिस्तान की राजनीति और नागरिक समाज में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं. इमरान खान की पार्टी PTI से जुड़े नेताओं ने कहा कि यह घटना साबित करती है कि जबरन देशभक्ति अब नहीं चलती. मानवाधिकार संगठनों, वकीलों और पत्रकारों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया.

मानवाधिकार संगठनों की कड़ी आलोचना

पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद ने इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि यह संविधान और पत्रकारिता की स्वतंत्रता का उल्लंघन है. संगठन के मुताबिक, लेख हटाना उसी समस्या का उदाहरण है, जिसकी ओर लेख में इशारा किया गया था.

क्या पाकिस्तान में बदल रही है सोच की राजनीति?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना बताती है कि पाकिस्तान में युवा पीढ़ी अब पुराने नियंत्रण और डर की राजनीति से बाहर निकल रही है. भले ही यह आंदोलन सड़कों पर न दिखे, लेकिन विचारों के स्तर पर यह बदलाव बहुत गहरा है. ज़ोरैन निज़ामानी का लेख भले ही वेबसाइट से हटा दिया गया हो, लेकिन वह सवाल छोड़ गया है, जिसे अब अनदेखा करना आसान नहीं होगा.

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