Aligarh News – अलीगढ़ की ताज़ा खबरें और ब्रेकिंग न्यूज़

Maharashtra Politics Ajit Pawar Death May Changes Politics NCP Could Also Face Crisis

Maharashtra Politics Ajit Pawar Death May Changes Politics NCP Could Also Face Crisis

news image

Ajit Pawar Death: सरकार के अलावा एनसीपी की बात करें तो अजित पवार के नेतृत्व वाली नेश्नलिस्ट कांग्रेस पार्टी यानी  NCP गुट काफी हद तक व्यक्तित्व-आधारित था.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन से पूरे राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव होने की संभावना है. पवार सिर्फ एक संवैधानिक पद पर नहीं, बल्कि सरकार के अंदर एक प्रमुख पावर मैनेजर के तौर पर जाने जाते थे, जिससे उनकी गैरमौजूदगी महाराष्ट्र के राजनीतिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव लाएगी.

मौजूदा और पूर्ववर्ती सरकारों में अजित पवार ने प्रशासनिक तालमेल, वित्तीय फैसले लेने और नौकरशाही प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई थी. अभी की बात करें तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के साथ सत्ता व्यवस्था में पवार की ताकत और सियासी क्षमता ने उनको एक अलग केंद्र बना रखा था. उनके जाने से यह संतुलन कमजोर हो जा सकता है.

अजित पवार की पार्टी का क्या होगा?

सरकार के अलावा पार्टी की बात करें तो अजित पवार के नेतृत्व वाली नेश्नलिस्ट कांग्रेस पार्टी यानी  NCP गुट काफी हद तक व्यक्तित्व-आधारित था. उनके नेतृत्व के बिना, एनसीपी को आंतरिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है. जानकारों की मानें तो भले ही गुट अपना आधिकारिक पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह बरकरार रखे लेकिन अजित के निधन से संगठनात्मक एकजुटता कमजोर हो सकती है.

इतना ही नहीं पश्चिमी महाराष्ट्र - विशेष रूप से बारामती, पुणे और अहमदनगर के कुछ हिस्सों में अजित पवार के निधन से खालीपन महसूस हो सकता है. चीनी मिलों और जिला बैंकों सहित सहकारी क्षेत्र के रास्ते पवार ने सत्ता के अहम पदों का रास्ता तय किया था. उनकी अनुपस्थिति सहकारी और स्थानीय राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र में नियंत्रण के लिए नई प्रतिस्पर्धा को जन्म दे सकती है, जिसका आगामी चुनावों पर प्रभाव पड़ेगा.

मुख्यमंत्री नहीं बन सके अजित पवार

अजित पवार को अक्सर ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जिन्होंने कई बार उपमुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन सके. दिसंबर 2024 में उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में छठी बार शपथ ली थी, जबकि उन्हें पहली बार 2010 में इस पद पर नियुक्त किया गया था. बारामती से आठ बार विधायक रहे अजित पवार का राजनीतिक पालन-पोषण उनके चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में हुआ. उन्होंने शरद पवार की छत्रछाया में रहकर राजनीति की बारीकियां सीखीं, जिसने उनके लंबे राजनीतिक करियर को आकार दिया.

Read more

Post a Comment

0 Comments