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Supreme Court Issues Notice Election Commission Seeking Prevent Political Parties From Accepting Cash Donations Ann

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चंदा कैश में लेने की अनुमति का विरोध करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. याचिकाकर्ता खेम सिंह भाटी ने जिस धारा को असंवैधानिक करार देने की मांग की है, वह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 13A(d) है.

राजनीतिक पार्टियों को 2000 रुपए तक का चंदा कैश में लेने की अनुमति का विरोध करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. याचिका में कहा गया है कि यह गलत चंदे को प्रोत्साहित करने वाली व्यवस्था है. अगर कोई लाखों-करोड़ों का नकद चंदा दे रहा हो, तो उसे भी कई लोगों की तरफ से मिले 2000 से कम के चंदे की तरह दिखाया जा सकता है.

याचिकाकर्ता खेम सिंह भाटी ने जिस धारा को असंवैधानिक करार देने की मांग की है, वह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 13A(d) है. याचिकाकर्ता ने इस बात का भी विरोध किया है कि राजनीतिक पार्टियों को 2000 रुपए से कम चंदा देने वाले दानदाताओं की जानकारी भी चुनाव आयोग या आयकर विभाग को बताने से छूट दी गई है. याचिका में कहा गया है कि लोगों को राजनीतिक पार्टी को चंदा देने वालों की जानकारी पाने का अधिकार है.

याचिका में चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अलावा 12 राजनीतिक पार्टियों- बीजेपी, कांग्रेस, डीएमके, सीपीएम, टीएमसी, बीएसपी, समाजवादी पार्टी, जेडीयू, बीजेडी, आम आदमी पार्टी, नेशनल पीपुल्स पार्टी और जेएमएम को पक्ष बनाया गया है.

याचिका में की गई प्रमुख मांगें यह हैं

  • इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 13A(d) को असंवैधानिक घोषित किया जाए.
  • चुनाव आयोग से कहा जाए कि वह सभी मान्यता प्राप्त दलों के चंदों का ब्यौरा देने वाले फॉर्म 24A की जांच करे. जिन चंदों में पते या पैन नंबर की जानकारी नहीं है, उनकी राशि पार्टी से जमा करने को कही जाए.
  • समय पर ब्यौरा न देने वाले दलों को इलेक्शन सिंबल ऑर्डर, 1968 के तहत नोटिस जारी कर उनके चुनाव चिन्ह को निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई की जाए.
  • राजनीतिक दलों को नकद में चंदा लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए. इसे रजिस्ट्रेशन और चुनाव चिन्ह आवंटन की शर्त बनाया जाए.

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील विजय हंसरिया की दलीलें सुनने के बाद सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया. मामले की सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी.

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