
पूरी दुनिया की 17% आबादी अकेले भारत में रहती है, मतलब हर 100 लोगों में से 17 यहीं के हैं. भारत अब दुनिया का सबसे ज्यादा भरा हुआ देश है — 146 करोड़ लोग. चीन 141 करोड़ पर दूसरे नंबर पर है, अमेरिका 35 करोड़, इंडोनेशिया साढ़े 28 करोड़ और पाकिस्तान साढ़े 25 करोड़ के साथ पीछे हैं.
World Population Day: भारत में बच्चा पैदा होने से पहले ही उसकी एक लाइन तय हो जाती है… और वही लाइन उसकी पूरी ज़िंदगी की कहानी बन जाती है. अस्पताल में डिलीवरी की तारीख के लिए लाइन, फिर जन्म प्रमाण पत्र की, फिर स्कूल, कॉलेज, नौकरी, इलाज, राशन, ट्रेनों, अदालत, और आखिर में मरने के बाद श्मशान या कब्रिस्तान की भी एक लाइन. सोचिए, ये जीवन है या लाइन में लगने की सज़ा? क्या हम अब सिर्फ एक नंबर बनकर रह गए हैं? दुनिया की सबसे बड़ी आबादी होने का ताज तो हमारे सिर है, लेकिन सबसे लंबा इंतज़ार भी हमारे ही हिस्से में है. हर तरफ भीड़ है, हर तरफ कतारें हैं और हर इंसान अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा है. ऐसा लगता है जैसे अब इंसान की पहचान उसका टोकन नंबर बन चुकी है.
ये 21वीं सदी का सच है जहां तरक्की की नहीं, बारी आने की होड़ लगी है. मैं भी इसी लाइन में खड़ा हूं…आप भी हैं. लेकिन, जब आज विश्व जनसंख्या दिवस है तो आइए एक बार रुककर सोचते हैं कि क्या ये लाइन हमें ज़िंदगी की तरफ ले जा रही है या बस खड़ा किए हुए है, वहीं... जिधर कोई रास्ता नहीं जाता?
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