
भारतीय राजनीति में नेताओं की अधिकतम उम्र को लेकर यह विवाद सरसंघचालक मोहन भागवत के नागपुर में की गई एक टिप्पणी से फिर से शुरू हुआ है. विपक्ष इस टिप्पणी को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साध रहा है.
राजनीति में नेताओं की उम्र एक अंतहीन बहस है, जिस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी ने उस बहस को फिर से जीवंत कर दिया है. मोहन भागवत की इस टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने मतलब निकाल रहे हैं, लेकिन मोहन भागवत की उम्र को लेकर की गई इस टिप्पणी ने इतना तो साफ कर दिया है कि संघ नेताओं की उम्र को लेकर अब सख्त होता जा रहा है.
नौकरी सरकारी हो या प्राइवेट, वहां के लिए न्यूनतम उम्र और अधिकतम उम्र की सीमा निर्धारित है. योग्यताएं भी निर्धारित हैं, लेकिन राजनीति में न्यूनतम उम्र के अलावा ऐसी कोई अर्हता निर्धारित नहीं है. लिहाजा बार-बार ये सवाल उठता है कि आखिर नेताओं को किस उम्र तक राजनीति में सक्रिय होना चाहिए. अब संघ प्रमुख ने इस बड़े सियासी सवाल का ऐसा जवाब दे दिया है, जो सबके लिए सबक की तरह है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 75 साल की उम्र पूरी होने के बाद नेताओं को दूसरों को भी मौका देना चाहिए.
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